शनैः पन्थाः शनैः कन्था शनैः पर्वतलङ्घनम्।
शनैर्विद्या शनैर्वित्तं पञ्चैतानि शनैः शनैः ॥
राह धीरे धीरे कटती है, कपड़ा धीरे धीरे बुनता है, पर्वत धीरे धीरे चढा जाता है, विद्या और धन भी धीरे-धीरे प्राप्त होते हैं, ये पाँचों धीरे धीरे ही होते हैं।
The path is cut slowly, the cloth is woven slowly, the mountain is climbed slowly, knowledge and wealth too are attained slowly; these five all happen gradually.
“गर फिरदौस बर-रूए ज़मीं अस्त,
हमीं अस्तो, हमीं अस्तो, हमीं अस्त।”
— अमीर खुसरो (फ़ारसी)
“अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है,
तो वह यहीं है, यहीं है, यहीं है।”
गर (Gar): अगर / यदि
फिरदौस (Firdaus): स्वर्ग (Paradise)
ज़मीं (Zamin): धरती / पृथ्वी
हमीं अस्त (Hamin ast): यहीं है / यही है
“तन को सौ सौ बंदिशें,
मन को लगी न रोक,
तन की दो गज कोठरी,
मन के तीनों लोक !!
आज के लिए फ़िलहाल इतना ही, आपकी तरह मैं भी मायूस हूँ,
लेकिन उम्मीद पर दुनिया क़ायम है!
दिल दुखा है, लेकिन टूटा तो नहीं है और उम्मीद का दामन छूटा तो नहीं है .
जिसकी नैया तैरती,
बैठे सब उस संग ।
जो फंसता मझधार में,
लड़े अकेले जंग ।
— आशा खत्री
जितना कम सामान रहेगा,
उतना सफ़र आसान रहेगा ।
— गोपालदास नीरज
वह पथ क्या, पथिक कुशलता क्या,
यदि पथ में बिखरे शूल ना हों,
नाविक की धैर्य परीक्षा क्या
यदि धाराएँ प्रतिकूल ना हो ।
— जयशंकर प्रसाद
पुरुष ने जीतने के लिए
ज्ञान रचा, तर्क रचे, ग्रन्थ रचे, धर्म रचे, युद्ध रचे
उसने समन्दर जीता, आसमान जीता, धरती जीती ।
स्त्री ने करुणा रची, और पुरूष को जीत लिया ।
— वीरेंदर भाटिया
जो मिला है वो कम नहीं,
जो नहीं मिला उसका कोई ग़म नहीं।
जो मिलेगा वो सिर्फ एक ख्वाब है,
और जो मिला है वो ही लाजवाब है।
जो खोया है उसका ग़म नहीं,
लेकिन जो पाया है वो किसी से कम नहीं ।
जो नहीं है वो एक ख़्वाब है,
और जो है वो लाजवाब है ।
Ye Hausla Kaise Jhuke
Ye Aarzoo Kaise Ruke
Manjil Muskil to Kya
Dhudhla Sahil to Kya
Tanhai Ye Dil to Kya
Raah Main Kante Bikhre Agar
Uspe To Phir Bhi Chalna Hi Hai
Shaam Chupa De Suraj Magar
Raat Ko Ek Din Dhalna Hi Hai
Rut Ye tal Jayegi
Himmant Rang Layegi
Subhah Phir Ayegi
Hoo . . .